Friday, July 16, 2010

मेरा आवांछित जीवन साथी

मुझे एक अदद जीवन साथी मिल गया है / जीवन साथी जिसको तो मै चाहता था और ना ही मेरे परिवार वाले / बिलकुल आप्रत्याशित तरीके से मिला मुझे मेरा जीवन साथी / कोई दिन पहले की बात है, मै बैंग्काक के सेनाके विशेष चिकित्शालय में दाखिल हुआ अपने सर में लगातार दर्द के वजह से / दाखिल होते ही चिकित्सकों नेपहला सवाल पूछा की कभी पहले ऐसा हुआ था ? तो मुझे हांग काँग याद गया, मै वहा भी इन्ही कारणों सेअस्पताल में दाखिल हुआ था / मैंने सच - सच पूरा पुराना प्रकरण सूना दिया / आदेश मिला की चुम्बकीयअनुनादी चित्रण होगा आपके मस्तिष्क का / मै थोड़ा सहमा लेकिन अगले ही पल सचेत हुआ की, पहले भी तो होचुका है हांग काँग में, मैंने अपनी स्वीकृत देने में एक क्षण भी नहीं जाया किया / उसके बाद चौकने की बारी मेरीथी, हांग काँग में थक्के थे मेरे दिमाग में और यहाँ थक्के मिले अनुनादी विश्लेषण के बाद / संभालना खुद कोकठिन प्रतीत हुआ एक क्षण के लिए लेकिन संभाला मैंने खुद को / विशेषज्ञ चिकित्सक का आदेश हुआ की मैतत्काल भर्ती हो जाऊ, लेकिन मेरा दुर्भाग्य कहिये या सौभाग्य की अस्पताल में कोई बिस्तर खाली ही नहीं था / इसलिए आज मै यह सब लिख पा रहा हूँ / परन्तु चिकत्सक ने अस्पताल छोडने से पहले बता दिया की बिस्तरखाली होते ही हम आपको आपके दूरभाष पर सूचित करेंगे और आप बिना किसी विलम्ब के उपस्थित होंगे / मैंनेसप्रेम हां में अपना सिर हिला दिया / देखेंगे कल क्या होगा /
चिकित्सक ने बताया की हम आपकी शैल्याचिकित्षा नहीं कर सकते, यह बीमारी अब तो आपके जीवन भर रहेगीऔर आपको आजीवन दवा खानी पड़ेगी / मै सोच में पड़ गया की पुरूष तो केवल पत्नी के साथ जिंदगी भर जीवनजीने का व्रत लेता है / मेरे बगल में तो यह बीमारी खड़ी है ज़िंदगी भर के लिए / खैर क्या कर सकते है, मुबारक होमुझे मेरा यह जीवन साथी /

2 comments:

Jandunia said...

शानदार पोस्ट

aradhana said...

ओफ्फोह ! ये थक्के तो बढते जा रहे हैं... लगता है कि तुम अपना ख्याल ठीक से नहीं रख रहे हो... take care ! my wishes are always with you dear.